TikTok Success Story
TikTok

2018 और 2019 में हम सब ने कई कंटेंट एप्स को जन्म लेते हुए देखा वो भी इंडियन लैंग्वेजेस में और दिन-ब-दिन इंटरनेट का यूज बढ़ने से यह ट्रेंड सामने आया की ऑडियंस को अलग-अलग लैंग्वेज में कंटेंट की डिमांड रहती है । इंडिया में 530 मिलियन इंटरनेट यूजर्स के साथ आज इंडिया वर्ल्ड का सेकंड लार्जेस्ट इंटरनेट यूजर बेस बन चुका है । कुछ फेमस प्लेटफार्म या एंटरटेनिंग एप्स जैसे Sharechat, Tik Tok, Vokal ऑडियंस के लिए कंटेंट बनाने के साथ उन्हें अलग ही तरह से देखते हैं क्या रीजन है जिसकी वजह से मॉडर्न इंडियन एप्स ब्रांड्स की हेल्प लेती है यही हम जानेंगे इस आर्टिकल में ।

Currently लगभग सारी इंडियन कंटेंट एप्स का यह प्लेटफार्म यूज करना फ्री भी है पर इसका यह मतलब नहीं कि इनकी यूज से डेवलपर्स को कोई प्रॉफिट नहीं हो रहा है । ब्रांड्स जैसे OYO, Licious, Amazon और Flipkart काफी अच्छे से जानते हैं ऑडियंस की जरूरत को और इंटरनेट के बेनिफिट्स को और इसीलिए ब्रांड्स भी इन्हीं कुछ बेस्ट इंडियन कंटेंट एप्स ऑडियंस को टारगेट करती है ऐड एडवरटाइजिंग के लिए । Licious के मार्केटिंग हेड Vanda Ferraro को इवेंट के डिस्कशन में बताया कि हमारे ऑनलाइन Meat और Sea Food स्टार्टअप के लिए लैंग्वेज एक बहुत ही इंपॉर्टेंट रोल प्ले करती है । Licious अपने रेवेन्यू का 55% डिजिटल एडवरटाइजिंग में स्पेंड करता है जिसमें से 5% इंडियन लैंग्वेज इज में जाता है और अब तो काफी स्टार्टअप्स और ब्रांड्स स्टार्टिंग से ही ट्राई करती है इंडियन लैंग्वेज कंटेंट एप्स के थ्रू एडवर्टाइज करने का ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा कंज्यूमर बेस मिल सके ।

2019 में Tik Tok सेकंड लार्जेस्ट डाउनलोड होने वाली ऐप रही और जिसमें से मैक्सिमम यूजर्स इंडिया के ही थे । इंडिया टिक टॉक के फर्स्ट टाइम डाउनलोड के 45% के लिए काउंटेबल है ग्लोबली अकॉर्डिंग टू ऐप इंटेलिजेंस इसी के साथ इंडिया का अक्टूबर 2019 में भी सबसे ज्यादा ऐप इंस्टॉल करने वाली कंट्री में नाम है । ब्रांड्स को फिक्र करने की जरूरत नहीं है ऑडियंस टारगेट करने के लिए ब्रांड्स इन एप्स के साथ काम कर सकती है अपने रिक्वायरमेंट्स के अकॉर्डिंग पर काफी प्रॉफिट भी कमा सकती है पर सवाल यह है कि यह मॉडल काम कैसे करता है । कंटेंट प्लेटफॉर्म्स ने प्रूफ कर दिया है कि इंडियन लैंग्वेज एप्स के लिए एक अच्छा मार्केट है और आजकल फास्ट इंटरनेट की वजह से इनका एक्सेस भी बहुत आसान हो चुका है । Sharechat और Tik Tok जैसे प्लेटफॉर्म्स  Micro-Influencers के साथ मिल के कंटेंट को प्री ऐड करते हैं ऐसे ब्रांड्स के लिए जो मल्टीपल लैंग्वेज इज ऑडियंस को टारगेट करती है और यह ब्रांड्स के लिए भी बेनिफिशियल है क्योंकि उनकी कॉस्ट ऑफ कंटेंट क्रिएशन कम हो जाती है ।

Vokal के को-फाउंडर Mayank Bidawatka ने एक्सप्लेन किया कि उनका प्लेटफार्म Vokal जवाब देता है जिन को ठीक से इंग्लिश नहीं आती है और ऐसे कंज्यूमर्स को जब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म यूज करते टाइम प्रॉब्लम है इंग्लिश बोलने या समझने में ऐसे में Vokal का मॉडल उनकी हेल्प करता है । Mayank मैं एक्सप्लेन किया कि उनके प्लेटफार्म के पास ऐसा कंटेंट है जो कंटेक्सुअल है और ब्रांड्स के साथ आसानी से काम भी कर सकता है । For Example :- अगर कोई Vokal पर सर्च करता है कि (What is the best time to visit Shimla) तो एप्लीकेशंस जैसे Make my trip, Yatra इन सवालों का जवाब दे सकते हैं । उन्होंने यह भी एक्सप्लेन किया कि Vokal CPC Model of Advertising पर काम करता है । CPM Model रेफेर करता है एडवरटाइजिंग Cost Per Thousand Impression से और वही CPC फोकस करता है Cost Per Click पर ।

RedSeer के एक रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल एडवरटाइजिंग रीजनल इंडिया में जो स्पेंड करता है वह गुरु कर सकता है जो 300 मिलियन डॉलर 2018 से 3 बिलीयन डॉलर्स 2030 तक कंजक्शन पैटर्न भी ग्रो कर रहे हैं । Gurugram बेस्ड फ़ूड टेक प्लेटफॉर्म Zomato का काफी प्रजेंस है । कंपनी ने ये बताया है कि इमर्जिंग सिटी उनके रेवेन्यू में 40% तक कंट्रीब्यूट करती है । सिटी जैसे जयपुर और सूरत के पास हाउसहोल्ड इनकम है जो 80000 पार कर गई है । यह एस्टीमेट किया गया है कि इन सिटीज की हाउसहोल्ड इनकम 40000 तक पहुंचेगी 2020 के अंत तक और ये ज्यादा लोगों को लाएगा ऑनलाइन ।

Aman Kumar चीफ बिज़नेस ऑफिसर आnalytical Firm Kalagato ने बताया कि Tier 2 और Tier 3 सिरीज़ के इम्पोर्टेन्ट फोकस एरिया है किसी भी स्टार्टअप के लिए । अगर आप टैक्सी फूड या ई-कॉमर्स के कॉम्पिटेटिव डायनामिक देखे तो लार्जर प्लेयर जैसे Swiggy और Zomato मेट्रोज मैं ज्यादा इस्टैबलिश्ड है । छोटे शहरों में ग्रो करने की अपॉर्चुनिटी प्रोवाइड करती है क्योंकि अंडर सर्विस मार्केट में आता है । Sharechat भी Visually Engaging प्लेटफार्म है जो ब्रांड्स को हेल्प करता है एग्जैक्ट वही ऑडियंस को टारगेट करने में उनकी मदद करता है ये वो यूजर्स हैं जो प्रीपेड डाटा प्लान के लिए पे करते हैं और उन्हें कंटेंट कि वही वॉल्यूम चाहिए जिसके लिए वो पे कर रहे हैं ।

अब एक और सवाल है कि क्या इसके लिए एन्ड यूजर कंटेंट के लिए पे करता है इस सवाल का उत्तर भी अभी भी साफ नहीं है कुछ फाउंडर्स का मानना है कि कंटेंट फ्री होगा उन कंज्यूमर्स के लिए जो अमाउंट नहीं देना चाहते हैं कुछ और लोगों का ये ओपिनियन भी है कि कंजंक्शन प्लेटफॉर्म ग्रो हो रहा है ये ऑडियंस वो नहीं है जो कंटेंट के लिए पे करेगी । ज्यादातर कंटेंट फ्री है और वह करेंटली फ्री कंजंक्शन की तरह ही यूज़ हो रहा है और यह ऐसा कंटेंट नहीं है जिसके लिए लोग पे करना चाहेंगे । Tire 2 और Tire 3 के कंज्यूमर्स इंडिया में ऐसे कंटेंट को यूज करना चाहते हैं जो वह अपने प्रीपेड डाटा प्लांस में कंज्यूम कर ले तो इसके चांसेस कम है कि कंज्यूमर्स इसके लिए पे करेंगे फ्यूचर में । प्लेटफार्म ब्रांड्स किस अमाउंट में Tie-up करते हैं ये तो साफ नहीं है पर हम ये अजूम कर सकते हैं कि ब्रांडेड कंटेंट और नेटिव एडवरटाइजिंग इंडियन लैंग्वेजेस की कंटेंट एप्स के लिए प्रायमरी सोर्स ऑफ रेवेन्यू होगा ।

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